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प्यार और खूबसूरती की व्याख्या !

मुझे उसे देखना पसंद है,  और उसे चांद की तरह दिखना पसंद है ! वो भी अपने दाग नहीं छुपाती,  आंखों में काजल माथे पर बिंदी नहीं लगाती, नरम होठों को उन्हीं के हाल पर छोड़ देती है,  मुस्कुराते ही समाज के सारे बांध तोड़ देती है, उसे कौन सिखाए संजना संवरना,  बदल ना जाए इस दुनिया का हाल वरना, मैं खुश हूं कि वो आईने से अपना हाल नहीं पूछती,  ये, वो, हां, नहीं बेफिजूल सवाल नहीं पूछती, सोचो अगर वो आंखों में काजल लगा ले,  एक दफा बस अपने उलझे बालों को सुलझा ले, फिर ये जमाना अपना रुख ना बदल दे,  ये हवाएं रुक ना जाए उसे देखने को कहीं! मैने जबसे उसे देखा है मैं हूं वहीं ! उसे देखा है जबसे होश आने लगा है, जमाने का सारा खौफ जाने लगा है, उसे कोई तोहफा देने को जी चाहता है, मगर उसके लायक कुछ कहां आता है, वो माथे पर बिंदी गालों पर रूज नहीं लगाती, वो कानों को झुमके के तले नहीं दबाती, उसे उड़ना पसंद है सोचता हूं उसको हवाएं दे दूं,  उसके पंखों को दिल की सदाये दे दूं, फिर सोचता हूं कि वो क्या करेगी मेरे इन फिजूल इशारों का, उसकी हँसी का तो अपना कारोबार है बहारों का, उसे मेरी ज...

क्या तुम मुझे कभी समझ पाओगी क्या?

तुमसे मिलने के ख्वाब देखता हूं,  मेरे ख्वाब को तुम हकीकत बना पाओगी क्या? बहुत गलतियां करता हूं, तुम कभी मुझे संभाल पाओगी क्या ? तुम मुझे देखो और मैं खामोश हो जाऊं, तो तुम मेरी खामोशी की वजह समझ पाओगी क्या ? कह दूं तुम्हे सीधा मेरे दिल की बात, तो क्या तुम भी अपने दिल की बात बताओगी क्या ? मैं जितना तुम्हे चाहता हूं, क्या तुम भी मुझे कभी उतना चाह पाओगी क्या ? मेरे दिल में सिर्फ तुम्हारी ही जगह है, तुम भी अपने दिल में मेरे लिए जगह बना पाओगी क्या ? क्या तुम कभी मुझे अपना बना पाओगी क्या? क्या तुम कभी मुझे समझ पाओगी क्या ?

तुम अब मेरे नहीं हो!

✍✍✍✍✍ तुम मेरे होकर भी अब मेरे नहीं हो, ये मलाल जिंदगी भर अब जायेगा नही ! जैसे छोड़ कर चले जाते है परिंदे आशियां अपना, वैसे तुम मुझे छोड़ कर जाओगे सोचा नहीं ! पास रह कर भी दूरियां है बहुत, ये फासला भी कभी बढ़ेगा सोचा नहीं ! तस्वीरें आज भी है तुम्हारी मेरे फोन में, ये महज़ एक तस्वीर रह जायेगी कभी सोचा नहीं ! तुम्हारे साथ बितानी थी पूरी जिंदगी अपनी, तुम से अलग होकर जीना भी पड़ेगा कभी सोचा नहीं ! ✍✍✍✍✍

यूसीसी (अनुच्छेद 44) : अँग्रेजों के 'बांटों और राज करो’ षड्यंत्र को तोड़कर भारत के सभी नागरिकों को समान अधिकार देने का प्रयास

कहने के लिये भारत का संविधान सेकुलर है किन्तु अलग अलग पंथ के नागरिकों के लिये अलग अलग अधिकार देने वाले कानून बने ।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंग्रेजों के जमाने के उन कानूनों को बदलने का अभियान चलाया हुआ है जो या अब अनुपयोगी हो गये हैं अथवा भारतीय समाज में विभेद पैदा करने वाले हैं। यूसीसी लागू होने के बाद भारत में सभी नागरिकों को समान सामाजिक अधिकार प्राप्त होगें। विशेषकर उन वर्ग समूहों में भी महिलाओं को सम्मान और विकास के समान अवसर मिलेगें जिनमें महिलाओं का शोषण की सीमा तक उपेक्षा होती है। मोदी सरकार ने अंग्रेजों के जमाने के कानूनों को समाप्त करने का अभियान छेड़ा हुआ है। अंग्रेजी के कोई दो सौ कानून ऐसे है॔ जो स्वतंत्रता सतहत्तर वर्ष बीत जाने के बाद भी लागू है॔। इनमें से एक सौ पैंतीस ऐसे कानूनों समाप्त कर दिया है जिनके उपयोग की कोई आवश्यकता नहीं रह गई थी। इसी अभियान के अंतर्गत अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में यूसीसी लागू करने की घोषणा की है। इसकी शुरुआत उत्तराखंड से हो गई। यह कानून भारतीय सामाज जीवन के उस विसंगति को दूर करने वाला है जो अंग्रेजों ने भारतीय समाज में विभेद ...

कैसे कहें कितने खास हो तुम!

कैसे कहें कितने ख़ास हो तुम, कि प्यार का एहसास हो तुम। सागर घूंट में पी लिया फिर भी, बुझती नहीं, वो प्यास हो तुम। फासले मीलों के रहे दरमियां, दिल में रहते हो पास हो तुम। अंधेरी रात में रौशनी करे जो, जलते दिए सी आस हो तुम। बेस्वाद ज़िन्दगी थी पहले मेरी, तुम आए लगा मिठास हो तुम। यूं फ़ना हुए तेरी मुहब्बत में कि, मेरी इस रूह का लिबास हो तुम।

हर रात चाँदनी होती !

उन सर्द रातों की सिहरन में तुम्हारे मुखड़े की रोशनी होती। तुम होते तो दिन सुनहरे होते और हर रात चाँदनी होती।। अधर रखो अपने, मेरे अधरों पर अब इतने भी सवाल ना करो। बाहों की चादर में सिमट जाओ रिवाजों का ना ख्याल करो। नींद, सपने, वस्ल, इरादे, वादे इन सब से दुश्मनी  होती। तुम होते तो दिन सुनहरे होते और हर रात चाँदनी होती। मेरी साँसों को तुमने साँसें दे कर मेरे भीतर का अनहद चूम लिया। तुझ संग मेरा नाम जुड़ जाने से मेरा हर अधूरापन झूम लिया। जब आँखों में जगते इक-दूजे के हमारी सारी बातें रेशमी होती। तुम होते तो दिन सुनहरे होते और हर रात चाँदनी होती ।

तुम फिर मिलना मुझे !

सच पूछो तो "तुम्हारा यूँ अचानक से चले जाने की ख़बर, ऐसे लगा जैसे गंगा आरती के बाद घाट का सूनापन" वक्त शायद फिर करवट ले , शायद हम फिर कभी मिलें , कब ? कैसे ? कहां ? कुछ नहीं पता, पर जब हम मिलेंगे तब मैं देखूंगा सच बोलती तुम्हारी उम्मीद भरी आंखों को , झूठ बोलते तुम्हरे उन रूखे लफ्ज़ों को, और बेबसी से थरथराते हुए मेरे मन को। अगर मैं हँस दूं तो समझना कि वो एक छलावा है, अगर मुस्कुरा दूं तो समझना तुम्हारे साथ की खुशी, अगर चुप बैठा रहूं तो समझना की बहुत कुछ कहना है, हां शायद वक्त भी कम पड़ जाए , पर अगर फ़िर कभी आना तो मिलना घड़ी की टिक टिक से परे। कम से कम इतना की वापस जाते वक्त तुम्हारे बालों की खुशबू रह जाए मेरी कमीज़ पर। "हां बस इतना..इतना ही।" कुल्हड़ की गर्म चाय, गंगा का पानी बनकर , तुम मिलना फिर मुझसे एक याद भरी कहानी बनकर.! तुम मिलना फिर मुझसे मेरे जीवन की एक निशानी बनकर.!