कैसे कहें कितने खास हो तुम!
कैसे कहें कितने ख़ास हो तुम, कि प्यार का एहसास हो तुम।
सागर घूंट में पी लिया फिर भी, बुझती नहीं, वो प्यास हो तुम।
फासले मीलों के रहे दरमियां, दिल में रहते हो पास हो तुम।
अंधेरी रात में रौशनी करे जो, जलते दिए सी आस हो तुम।
बेस्वाद ज़िन्दगी थी पहले मेरी, तुम आए लगा मिठास हो तुम।
यूं फ़ना हुए तेरी मुहब्बत में कि, मेरी इस रूह का लिबास हो तुम।
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