क्या तुम मुझे कभी समझ पाओगी क्या?

तुमसे मिलने के ख्वाब देखता हूं, 

मेरे ख्वाब को तुम हकीकत बना पाओगी क्या?


बहुत गलतियां करता हूं,

तुम कभी मुझे संभाल पाओगी क्या ?


तुम मुझे देखो और मैं खामोश हो जाऊं,

तो तुम मेरी खामोशी की वजह समझ पाओगी क्या ?


कह दूं तुम्हे सीधा मेरे दिल की बात,

तो क्या तुम भी अपने दिल की बात बताओगी क्या ?


मैं जितना तुम्हे चाहता हूं,

क्या तुम भी मुझे कभी उतना चाह पाओगी क्या ?


मेरे दिल में सिर्फ तुम्हारी ही जगह है,

तुम भी अपने दिल में मेरे लिए जगह बना पाओगी क्या ?


क्या तुम कभी मुझे अपना बना पाओगी क्या?

क्या तुम कभी मुझे समझ पाओगी क्या ?

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