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Showing posts from July, 2022

अद्भुत जिंदगी !

यदि आपने :  बखरी की कोठरी के ताखा में जलती ढेबरी देखी है। दलान को समझा है। ओसारा जानते हैं। दुवारे पर कचहरी (पंचायत) देखी है। राम राम के बेरा दूसरे के दुवारे पहुंच के चाय पानी किये हैं। दतुअन किये हैं। दिन में दाल-भात-तरकारी खाये हैं। संझा माई की किरिया का मतलब समझते हैं। रात में दिया और लालटेम जलाये हैं। बरहम बाबा का स्थान आपको मालूम है। डीह बाबा के स्थान पर गोड़ धरे हैं। ताल के किनारे और बगइचा के बगल वाले पीपर और स्कूल के रस्ता वाले बरगद के भूत का किस्सा (कहानी) सुने हैं। बसुला समझते हैं। फरूहा जानते हैं। कुदार देखे हैं। दुपहरिया मे घूम-घूम कर आम, जामुन, अमरूद खाये हैं। बारी बगइचा की जिंदगी जिये हैं। चिलचिलाती धूप के साथ लूक के थपेड़ों में बारी बगइचा में खेले हैं। पोखरा-गड़ही किनारे बैठकर लंठई किये हैं। पोखरा-गड़ही किनारे खेत में बैठकर 5-10 यारों की टोली के साथ कुल्ला मैदान हुए हैं। गोहूं, अरहर, मटरिया का मजा लिये हैं अगर आपने जेठ के महीने की तीजहरिया में तीसौरी भात खाये हैं, अगर आपने सतुआ का घोरुआ पिआ है, अगर आपने बचपन में बकइयां घींचा है। अगर आपने गाय को पगुराते हुए देखा है। अगर ...

बचपन लौटा दो!

फिसल गया जो हाथ से वो वक़्त मुझे लौटा दो,  हे महादेव! वरना मेरी यादों से मेरा बचपन मिटा दो। बेफिक्र घूमता देख इनको बेइंतहा रश्क करता हूँ , मुझे तुम इन बच्चों के संग फिर से बच्चा बना दो। मिट्टी के मर्तबान में उन सिक्कों की धुन याद है,  यादों की गुल्लक से चंद लम्हें मुझे और दिला दो।  वो रंगीन बर्फ के ठेले, चाचा के चाट का स्वाद,  फिर जिंदगी का वही पुराना लज्जत वापस चखा दो।  हर वक़्त परेशान रहता हूं, खुद से बातें करता हूं,  मुझे इस दुनियादारी की बीमारी का इलाज बता दो।  तू रख मेरा सब कुछ, लेले मेरी सारी खुशियां,  बस एक बार उन गुज़िश्ता सालों को जिंदा करा दो। 

सुनो!

सुनो ! हाँ तुम्हारे मैसेज का ही इन्तज़ार रहता है  गुज़रते हो जब तुम इन आँखों के सामने से  तो ये नज़रे तुम पर आकर ठहर जाती है  और जिस अदा से तुम छुप छुप के देखा करते हो ना  कसम खुदा की मुझे खुद से मुहब्बत हो जाती है  हाँ तुम्हारे एक View के लिए अक्सर मेरे Whatsapp का status लगता है  और हाँ जो तुम ये पूछते हो ना कि ये किसके लिए लिखा  तो हाँ वो तुम्हारे लिए ही लिखा होता है  मैं ये नहीं जानता कि तुम मेरे लिए क्या हो बस इतना समझ जाओ  मैं डूब जाऊँ जिन ख्यालों में उन ख़्यालों की एक वजह हो तुम कभी कभी जी करता है, तुम्हें अपनी बाहों में कैद कर लूं । कभी कभी जी करता है , तेरे दामन में सिर रख दो पल रो लूँ । कभी कभी जी करता है , तेरी जुल्फों में छिप सवेरे को शाम कर दूँ । लेकिन जब जब जी करता है , तब तब दिमाग कुछ यूं बयान करता है । अगर वो बाहों में कैद हो भी गए ,  तो उस कैदी को और जुर्म करने से रोक पाओगे कैसे? अगर उसके दामन में दो पल रो भी लिए , तो उसके पहले से गिले दामन में तुम तैर पाओगे कैसे? अगर उसकी जुल्फों में छिप भी गए , तो उनकी काली घटाओं से खु...

तुम धड़कन बनोगी क्या?

मैं चाहकर भी नहीं बोल पाता जो, तुम मेरी वो अधूरी बात बनोगी क्या? चुपचाप सा हूँ मैं बहुत, तुम अल्फाज़ बनोगी क्या? फीके से है होंठ मेरे, इनकी मुस्कुराहट बनोगी क्या? एक प्यारा सा दिल है मेरे पास, तुम धड़कन बनोगी क्या ? कुछ सपने है मेरे पास, उनकी उड़ान बनोगी क्या? तेरे हिस्से के ग़म मैं सह लूँगा, तुम मेरी ख़ुशी बनोगी क्या ? दर्द बहुत है मेरे जीवन में, तुम हमदर्द बनोगी क्या? वादे तो सभी हजार करते हैं, तुम निभाने वाली बनोगी क्या? मैं जिद्दी बहुत हूँ, तुम मेरी जिद बनोगी क्या? मुझे नींद बहुत कम आती है, तुम सुलाने वाली बनोगी क्या? मुझे तुम्हें बेइंतहा मुहब्बत है, तुम भी मुझसे करोगी क्या? अकेला चलने वाला मुसाफिर हूँ मैं, मेरी हमसफर बनोगी क्या?

यूँ ही

कभी कभी कुछ याद कर लिया करो यूं ही वीरानों को आबाद कर लिया करो यूं ही। इस मरकज़ मे न रह जाऊं कहीं तन्हा चश्म ए नम दीदार कर लिया करो यूं ही। मांजिलों से कोई क्या गिला शिकवा चलते चलते याद कर लिया करो यूं ही। अपने मरासिम मे कोई कमी होगी खिलवत मे फ़रियाद कर लिया करो यूं ही। मुद्दत से वहशत दिल की नही जाती ख्यालों से आजाद कर लिया करो यूं ही। फक्त हमीं तो न थे वाकिफ रस्तों से रुख कभी इस पार कर लिया करो यूं ही। हमने कब तुझको जंजीर किया कभी कोई इकरार कर लिया करो यूं ही। -- हर्ष तारा सिंह