सुनो!
सुनो !
हाँ तुम्हारे मैसेज का ही इन्तज़ार रहता है
गुज़रते हो जब तुम इन आँखों के सामने से
तो ये नज़रे तुम पर आकर ठहर जाती है
और जिस अदा से तुम छुप छुप के देखा करते हो ना
कसम खुदा की मुझे खुद से मुहब्बत हो जाती है
हाँ तुम्हारे एक View के लिए अक्सर मेरे Whatsapp का status लगता है
और हाँ जो तुम ये पूछते हो ना कि ये किसके लिए लिखा
तो हाँ वो तुम्हारे लिए ही लिखा होता है
मैं ये नहीं जानता कि तुम मेरे लिए क्या हो
बस इतना समझ जाओ
मैं डूब जाऊँ जिन ख्यालों में उन ख़्यालों की एक वजह हो तुम
कभी कभी जी करता है, तुम्हें अपनी बाहों में कैद कर लूं ।
कभी कभी जी करता है , तेरे दामन में सिर रख दो पल रो लूँ ।
कभी कभी जी करता है , तेरी जुल्फों में छिप सवेरे को शाम कर दूँ ।
लेकिन जब जब जी करता है , तब तब दिमाग कुछ यूं बयान करता है ।
अगर वो बाहों में कैद हो भी गए ,
तो उस कैदी को और जुर्म करने से रोक पाओगे कैसे?
अगर उसके दामन में दो पल रो भी लिए ,
तो उसके पहले से गिले दामन में तुम तैर पाओगे कैसे?
अगर उसकी जुल्फों में छिप भी गए ,
तो उनकी काली घटाओं से खुद को बचा पाओगे कैसे?
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