बचपन लौटा दो!
फिसल गया जो हाथ से वो वक़्त मुझे लौटा दो,
हे महादेव! वरना मेरी यादों से मेरा बचपन मिटा दो।
बेफिक्र घूमता देख इनको बेइंतहा रश्क करता हूँ ,
मुझे तुम इन बच्चों के संग फिर से बच्चा बना दो।
मिट्टी के मर्तबान में उन सिक्कों की धुन याद है,
यादों की गुल्लक से चंद लम्हें मुझे और दिला दो।
वो रंगीन बर्फ के ठेले, चाचा के चाट का स्वाद,
फिर जिंदगी का वही पुराना लज्जत वापस चखा दो।
हर वक़्त परेशान रहता हूं, खुद से बातें करता हूं,
मुझे इस दुनियादारी की बीमारी का इलाज बता दो।
तू रख मेरा सब कुछ, लेले मेरी सारी खुशियां,
बस एक बार उन गुज़िश्ता सालों को जिंदा करा दो।
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