काश कोई समझें जज़्बात इस दुनियाँ में
काश कोई समझें जज़्बात इस दुनियाँ में हर कोई छोड़ देता हैं हाथ इस दुनियाँ में होते हैं कई लोग हर शाम इस महफ़िल में सुबहें छोड़ देते हैं सब साथ इस दुनियाँ में शायद सो जाउ तो कुछ राहत मिले मेरे ख़्यालों को पर हुई नहीं ना जाने क्यों रात इस दुनियाँ में मुकम्मल था एक जहां तेरे होने से देख अब कोई नहीं तेरे बाद इस दुनियाँ में वैसे तो पहलें भी हुए हैं कई लोग बेवफ़ा पर अब होती है सिर्फ़ तेरी बात इस दुनियाँ में