मुहब्बत से पुकारा करो

मुझ पर इतना ना कहर तुम ढाया करो 
मिला करो, ख्वाबों में ना सताया करो 

दिल में छुपी या लबों पर रुकी हुई है 
जो है अनकही, वो बात बताया करो 

हर्ष सुनते हो, हर्ष सुनो ना कहके 
तुम शहद जैसी मीठी आवाज सुनाया करो 

सुबह सुबह हसीन मुस्कान दिख जाए 
शगुन बनके मुझको नजर आ जाया करो 

शाम को घर के लिए कदम रखूं जैसे ही 
मुस्कराते हुए सामने आ जाया करो 

जुल्फें उलझी हुई और पेचों वाली है
मैं सुलझाऊं और तुम उलझाया करो 

"हर्ष" कहके मुहब्बत से पुकारो 
तुम ज़ज्बात छुपा के ना तड़पाया करो 

-- हर्ष तारा सिंह 

Comments

Popular posts from this blog

The story of Srikalahasti (Vayu Lingam)

बांसगाँव का इतिहास ! 300 वर्षों से चली आ रही अनोखी परंपरा

प्यार और खूबसूरती की व्याख्या !