इश्क़

दिल मेरा मुझे लौटा कर अहसान कहते हो, 
अरे होश में आओ फ़रेबी किसे बेईमान कहते हो ।

सौदा ऐसा की मूल भी तुम्हारा और ब्याज भी तुम्हारा,
ख़ुदा से डरो जो मोहब्बत को मेरी नुक्सान कहते हो ।

बिना चिंगारी के भी क्या उठता है धुआँ कभी,
गलतियाँ अपनी छुपा कर मुझे नादान कहते हो ।

महकते फूलों को ख़ुद बेरहमी से झुलसा कर,
अब इस गुलशन को सरेआम मसान कहते हो ।

लगेगी एक उम्र जनाब अब किसी और को चाहने में,
इश्क़ करना नहीं आता गर इश्क़ को आसान कहते हो ।


-- हर्ष तारा सिंह 

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