लता या लतिका
आँखों में शरारत, अंदाज़ में बेबाकपन,
जैसे कोई अल्हड़ बचपन ...
ये शर्म-ओ-हया, हाथों की कपकपाहट, धड़कनों की घबराहट,
उसपर एक सुंदर प्यारी मुस्कराहट ...
हाय तौबा ये उसका शबाब, खुशबू जैसे बगिया गुलाब,
उसकी सादगी में भी ताज़गी ...
ये अद्भुत नज़राना, कौन हो तुम, लता या लतिका,
सुरसुन्दरी, परी या देवांगना ...
तुमको खुदा ने बनाया है, या खुदा खुद को ही,
ज़मीन पर ले आया है ...
-- हर्ष तारा सिंह
------ शब्दकोश------
बेबाकपन: निडरता
अल्हड: भोला
शबाब: जवानी
लता: अप्सरा
लतिका: आकाशिय अप्सरा
ये अद्भुत नज़राना, कौन हो तुम, लता या लतिका,
ReplyDeleteसुरसुन्दरी, परी या देवांगना ...
अति सुन्दर प्रस्तुति मन को मोह लिया