मुस्कुराता चेहरा 😊

नींद खुलती है किसी ख्वाब से लड़ते हुए,
एक मुस्कुराता चेहरा याद आता है जहन में चलते हुए ।

उबलने लगते हैं दिल में ख्वाब कई सारे,
वो मुझसे पूछता है क्यूँ सवाल इतने सारे ।

हर पन्ना पलटता है माजी की किताब का,
और हिसाब करता है मेरे हर गुनाह का ।

मुझसे जिरह भी करता है मेरी ही ओर से,
फिर अपना फैसला सुनाता है जोर से ।

जला दो, दफन कर दो, या गम-ए-दुनिया में मिला दो,
मेरी उन कशमकश यादों को चाहे दिल के हर पन्ने से मिटा दो ।

छिपा दो चाहे तुम मुझे किसी भी रोशनाई से,
अपनी कहानियां लिखोगे तुम मेरी ही सिपाही से ।।



-- हर्ष तारा सिंह 


------ शब्दकोश------
माजी: बीता कल 
जिरह: हुज्जत करना 
रोशनाई: स्याही, उजाला 
सिपाही: अंधेरा 

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