प्रेम के अंतिम चरण में बस तुम्हें पीड़ा मिलेगी। हाँ सखे पीड़ा मिलेगी, बस तुम्हें पीड़ा मिलेगी! आज बंधन लग रहें जो वह तो केवल एक मृषा है, मोह का अलोक है यह देह की किंचित तृषा है। नित्य भय मे बांधे रखे अल्प मृत्यु द्वार है यह, मेनका की छल कथा का बस समझ लो सार है यह। हो ना पाए बुद्ध गर तुम और लिप्सा में समाए, स्वयं से केवल द्वंद होगा अश्कों की क्रीड़ा मिलेगी। प्रेम के अंतिम चरण में बस तुम्हें पीड़ा मिलेगी। सुख समझते हो जिसे तुम कष्ट का कारक बनेगा, आत्मा के पोर रिस कर पीर का वाहक बनेगा। बुन लिया जो तुमने जीवन स्वार्थ और आसानियो में, श्वास अंतिम तुम भरोगे देखना फिर ग्लानियों में। चित्त स्थिर कर न पाए यदि जगत की लालसा में, फिर तुम्हें अनहद दुखों की महज़ बीड़ा मिलेगी। प्रेम के अंतिम चरण में बस तुम्हें पीड़ा मिलेगी। फूलते हो आज बल पर कल अशक्ति, दीन होगे, त्याग देगा प्राण तन को फड़फड़ती मीन होगे। कामना ऐसी ज़हर है इंद्रियों को मार देगी, भ्रष्ट कर देगी ह्रदय को लोभ को आगर देगी। स्वल्प जीवन की सनातन आत्मा दूषित हुई गर, फिर किसी भागीरथी से भी नहीं तृणा मिलेगी। प्रेम के अंतिम चरण में बस तुम्हें पीड...